बसामन मामा गौवंश वन्य विहार

माननीय श्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री

माननीय श्री अमित शाह

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री

माननीय डॉ मोहन यादव

मुख्यमंत्री, म प्र शासन

माननीय श्री राजेंद्र शुक्ल

उपमुख्यमंत्री, म प्र शासन

This is the

Lorem ipsum dolor sit amet,

This is the heading

Lorem ipsum dolor sit amet,

is the heading

Lorem ipsum dolor sit amet,

the heading

Lorem ipsum dolor sit amet,

गौ माता का महात्म...

सुखी धेनु सत जुगहि बसाई। दुखी काल कलि दियो बनाई ।।
मृत भइ संस्कृति जीवित कीजो। सत सत गुरदच्छिन सोइ दोज्यो ।।

भावार्थ – जब गौ माता सुखी होती है तो धरती पर सतयुग आ जाता है। जहां गौ माता दुखी होती है वहां कलियुग आ जाता है। मरी हुई संस्कृति को जीवित करना ही सच्ची गुरु दक्षिणा देना है।

सनातन मान्यता के अनुसार, गाय में सभी देवी-देवता वास करते हैं। अतः गाय के पूजन, उसकी सेवा तथा बुराइयों से दूर रहने, परोपकार से ही सुख, सौभाग्य और सुरक्षित जीवन की प्राप्ति हो सकती है।

हिंदुओं के लिए गाय केवल एक पशु नहीं है बल्कि इनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। हिन्दुओं के लिए गाय 33 करोड़ हिंदू देवताओं का आराध्य हैं और इसीलिए गाय को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है, गाय को शुभ माना गया है. गाय हिन्दुओं के लिए करुणा और पवित्रता का भी प्रतीक है।

पर्यावरण के रक्षक लोकदेवता बसामन मामा

लोकदेवता बसामन मामा ने लगभग 8 शताब्दी पहले इसी भूमि में पर्यावरण की रक्षा के लिए आत्म बलिदान दिया था। लोक मान्यता के अनुसार यहाँ पर पीपल के एक वृक्ष को अनाथ बालक ने अपना पिता और उसके नीचे स्थित चबूतरे को अपना आश्रय स्थल बना रखा था। इस वृक्ष की रक्षा के लिए हमेंशा तत्पर रहने वाले बसामन मामा इस अंचल में लोकप्रिय हुये। कहा जाता है कि उन्होंने साधना कर कुछ सिद्धियां प्राप्त की थी जिससे दूर दूर तक उनके प्रति लोक आस्था थी।

एक बार राजा के सैनिकों ने अपने पड़ाव में शामिल होंथियों के खाने के लिए उस पीपल के वृक्ष को काटने की चेष्टा की जिसका प्रतिरोध बसामन मामा ने किया। तत्कालीन राजा ने इसे अपना अपमान समझ कर बसामन मामा को दण्डित करने का निश्चय लिया जिसके लिए उन्होंने ने उस पीपल के वृक्ष को काटने की कुचेष्टा करके बसामन मामा को अपमानित किया। तब बसामन मामा ने अपनी सिद्धियों से उस पेड़ को बचाये रखने के लिए सैनिकों से मुकाबला किया। लेकिन राजा के एक पड़यंत्र के तहत जब बसामन मामा विवाह करने के लिए अपने ससुराल गए उसी रात राजा ने पीपल के उस वृक्ष को जड़ मूल से नष्ट करवा दिया। अगली सुबह बसामन मामा जब दूल्हे के रूप में वापस लौटे तो कटे हुए पीपल के वृक्ष देख कर क्रोध अग्नि में जलने लगे और राजा को इस हत्या के लिए श्राप देते हुए अपनी ही कटार से आत्माहूति दे दी।

 इस घटना के बाद उन्हें बसामन से बसामन मामा की ख्याति मिली। इसी कटे पीपल के वृक्ष के नीचे उनकी समाधि है जिसको स्थानीय लोग पूजते हैं। लोक मान्यता है कि इस सुरम्य वन अंचल के पर्यावरण संरक्षण में बसामन मामा की प्रेरणा और कृपा बनी हुई है।

गौवंशों को आश्रय एवं सेवा

सतयुग से लेकर कलयुग के मध्यकाल तक जिस गौ की पूजा की जाती रही वह भौतिकवादी संस्कृति और जीवनशैली के कारण वह उपेक्षित हो कर वर्तमान में बेसहारा भटक रही है, पोलिथिन खा कर / सड़कों पर दुर्घटना ग्रस्त होकर असमय काल के गाल में समा रही गौ माता / निराश्रित गौवंशों की ह्रदय विदारक घटनाएं हो रहीं हैं। वही दूसरी और आवारा गौ वंश से किसानों के सामने खेती बचाने का संकट है।
इस गंभीर समस्या के समाधान के उद्देश्य हेतु मध्यप्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी और विंध्य के लाड़ले सपूत, मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं रीवा विधायक श्री राजेन्द्र शुक्ल जी ने गौ वंश की रक्षा के लिए अशासकीय और शासकीय स्तर पर गौ संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर गौ संरक्षण केंद्र स्थापित करने का आह्वान किया।

मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला में से एक लगभग 51 एकड़ के क्षेत्रफल में निर्मित हुए 10,000 गौवंशों की सेवा क्षमता रखने वाली वृहद गौशाला “बसामन मामा गौवंश वन्य विहार” ग्राम पुर्वा सेमरिया जिला रीवा की स्थापना किया जो निराश्रित गौवंशों की सेवा को समर्पित है।लोक देवता बसामन मामा की प्रेरणा से यह धरा पर्यावरण संरक्षण का केंद्र है, क्योकि यह क्षेत्र वन एवं नदी के मध्य स्थित है। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में असक्त असहाय एंव दुग्ध न देने वाले गोवंशो को आश्रय प्रदाय करते हुये उनके भरण पोषण एंव उपचार की उत्तम व्यवस्था उपलब्ध है। अब इस पुण्य धरा पर गौवंशों की सेवा का कार्य निरंतर अग्रसर है। आप भी इस पुण्य कार्य से जुड़कर अपना सहयोग प्रदान करें।

वीडियो